एंबुलेंस सेवा पटरी पर लाने की कोशिश, छह चालकों पर लगा एस्मा

गाजीपुर। चालकों की बेमियादी हड़ताल से ठप सरकारी एंबुलेंस सेवा को फिर से पटरी पर लाने की कवायद शुरू हो गई है। इस क्रम में डीएम एमपी सिंह के सख्त आदेश के बाद जहां सेवा प्रदाता एजेंसी जीवीके ने नए चालकों की तैनाती कर दी है। वहीं छह हड़ताली चालकों के विरुद्ध आवश्यक सेवा अनुरक्षण अधिनियम 1981 (एस्मा) के तहत शहर कोतवाली में एफआईआर दर्ज कराई है।
एसीएमओ डीपी सिन्हा ने दावा किया कि गाजीपुर में कुल 82 एंबुलेंस सेवा से जुड़ी हैं और इनमें 78 रनिंग मोड में आ गई हैं जबकि शेष चार मैकेनिकल गड़बड़ी के कारण अभी खड़ी हैं। इन्हें भी जल्द ही दुरुस्त कर सड़क पर ला दिया जाएगा। कुल एंबुलेंस में 108 सेवा की 37, 102 सेवा की 42 और एडवांस लाईफ सपोर्ट (एएलएस) की तीन एंबुलेंस हैं।
डॉ. सिन्हा ने बताया कि रनिंग मोड में आईं एंबुलेंसों पर ईएमटी स्टाफ के रूप में सीएचओ, एएनएम तथा स्टाफ नर्सों को रगाया गया है।एस्मा के तहत शहर कोतवाली में दर्ज कराई गई एफआईआर में नामजद हड़ताली एंबुलेंस चालकों में राहुल गुप्त, प्रमोद कुमार, उमेंद्र कुमार, विश्वजीत, रमेश गौर तथा मनोज यादव हैं।
मालूम हो कि अपनी मांगों को लेकर गाजीपुर सहित प्रदेश भर के एंबुलेंस चालक बीते 26 जुलाई को बेमियादी हड़ताल पर चले गए थे। उनकी मांगों में सेवा प्रदाता एजेंसी के बदलने पर उन्हें हटाया न जाए। उनको ठेकेदारी प्रथा से मुक्त किया जाए। कोरोना में जान गंवाने वाले साथियों के आश्रीतों को 50 लाख का मुआवजा और उन्हे एनएचएम के अधीन किया जाए।