सामाजिक और आर्थिक न्याय के बगैर समानता की बात बेमानीः मनोज सिन्हा

गाजीपुर। जम्मू-कश्मीर के उप राज्यपाल मनोज सिन्हा मानते हैं कि समानता के बगैर देश की आजादी बेमतलब है और समानता सामाजिक तथा आर्थिक न्याय से ही संभव है।
समाजसेवी संस्था उत्थान फाउंडेशन ट्रस्ट वयपुर देवकली में शुक्रवार को तृतीय वार्षिकोत्सव पर आयोजित विकसित वैभवशाली भारत निर्माण में समाज के अंतिम व्यक्ति की अनिवार्य सहभागिता' विषयक संगोष्ठी में वह बोल रहे थे। अपने लिखित उद्बोधन में उन्होंने कहा कि गरीबी हटाने, सबको रोटी-मकान के नारे दशकों पहले से लगते रहे हैं लेकिन इन नारों को जमीन पर उतारने का असल काम मई 2014 के बाद ही शुरू हुआ। यह सबको पता है। समाज के अंतिम व्यक्ति तक सामाजिक और आर्थिक न्याय पहुंचने का जागरण अब शुरू हुआ है। उनका कहना था कि दुनिया में हमारी पहचान केवल आर्थिक समृद्धि से ही नहीं बल्कि अपनी सांस्कृतिक-आध्यात्मिक समृद्धि से भी रही है। स्वतंत्रता के बाद देश दिशाहीनता की स्थिति में था लेकिन आज देश को ऐसा समर्थ व दूरदर्शी नेतृत्व मिला है जिससे देश सही दिशा में बढ़ चला है। समता तथा सामाजिक समरसता के रास्ते पर चलकर वंचित वर्गों को पहली बार सामाजिक न्याय दिलाने का ऐतिहासिक कार्य हो रहा है।
उत्थान फाउंडेशन के कार्यों की सराहना करते हुए उप राज्यपाल ने कहा कि यह फाउंडेशन समाज के अंतिम व्यक्ति के उत्थान में लगा है। इस मौके पर उन्होंने परिसर में प्रस्तावित आरोग्य कुटीर का शिलान्यास किया। साथ ही रायपुर छत्तीसगढ़ से आए आध्यात्मिक व सामाजिक चेतना जागरण में सतत् संलग्न वयोवृद्ध बजरंग मुनि को स्मृति-चिह्न व अंगवस्त्रम् प्रदान कर सम्मानित किया। इसीक्रम में उनके हाथों फाउंडेशन से जुड़े लोग भी सम्मानित हुए। फिर उप राज्यपाल सहभागिता भोज में भी सम्मिलित हुए।
कार्यक्रम की अध्यक्षता सच्चिदानंद राय चाचा ने की। अतिथियों का स्वागत ट्रस्ट के संस्थापक सचिव इं. संजीव गुप्त ने किया। इस अवसर पर विभिन्न कलाकारों ने देशभक्ति गीत, भजन एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। कार्यक्रम मे यीशु महाराज, सहकारिता राज्य मंत्री डॉ. संगीता बलवंत, विधायक सुभाष पासी, भानुप्रताप सिंह,कृष्ण बिहारी राय, सरोज कुशवाहा, सुनिल सिंह, ओमप्रकाश गुप्त, विनोद अग्रवाल, संकठा मिश्र, शशिकांत शर्मा, नरेंद्र सिंह, कुंवर रमेश सिंह पप्पू, आनंद सिंह, राकेश राय, मनीष सिंह बिट्टू, राजेश भारद्वाज, रामराज वनवासी, राममूर्ति बांसफोर, ओमप्रकाश तिवारी बच्चा, प्रवीण त्रिपाठी, सुरेश बिंद आदि प्रमुख लोग उपस्थित थे।