“बीमारी फैले, बदबू बहे—सिस्टम सोए: गड़ुआ मकसूदपुर में गंदा पानी, प्रशासन मौन”

गाजीपुर। गड़ुआ मकसूदपुर गांव में गंदे पानी का स्थायी जलभराव अब केवल असुविधा नहीं, बल्कि एक गंभीर जनस्वास्थ्य संकट का रूप ले चुका है। यह वही रास्ता है, जिससे हर रोज़ लगभग 1000 से अधिक लोग आवागमन करते हैं और जो सीधे जमानियां–गाजीपुर राष्ट्रीय राजमार्ग (NHI) से जुड़ा हुआ है। इसके बावजूद जिम्मेदारों की संवेदनहीनता इस हद तक है कि डीपीआरओ द्वारा नोटिस जारी होने के बाद भी ग्राम प्रधान और सचिव के कान पर जूं तक नहीं रेंगी।
इस गंभीर समस्या को लेकर गड़ुआ मकसूदपुर के पूर्व प्रधान मंटू राय ने लगातार आवाज़ उठाई। उन्हीं के प्रयासों से जिला पंचायत राज अधिकारी (डीपीआरओ) को मौके पर निरीक्षण करना पड़ा और स्थिति की भयावहता सामने आई। निरीक्षण में साफ़ पाया गया कि नाली की समुचित निकासी न होने के कारण रास्ते पर गंदा पानी फैला हुआ है, जिससे संक्रमण और गंभीर बीमारियों का सीधा खतरा बना हुआ है।
डीपीआरओ ने स्पष्ट शब्दों में संबंधित अधिकारियों को समस्या के त्वरित समाधान के निर्देश दिए, लेकिन 15 दिन से अधिक समय बीत जाने के बाद भी हालात जस के तस हैं। गांव में यह चर्चा आम हो चली है कि शायद प्रशासन तब जागेगा, जब इस गंदे पानी से फैलने वाली बीमारी किसी की जान ले लेगी।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह रास्ता केवल गांव का नहीं, बल्कि मुख्य संपर्क मार्ग है। स्कूली बच्चे, बुजुर्ग, महिलाएं और राहगीर हर दिन इसी गंदगी से होकर गुजरने को मजबूर हैं। दुर्गंध, मच्छरों का प्रकोप और फिसलन ने जीवन को नारकीय बना दिया है।
इस पूरी लड़ाई में पूर्व प्रधान मंटू राय एक बार फिर जनता के लिए ढाल बनकर खड़े हैं। पद पर न रहते हुए भी उन्होंने जिस संवेदनशीलता और संघर्ष के साथ इस मुद्दे को उठाया, वह जनप्रतिनिधित्व की सच्ची मिसाल है। गांववाले साफ़ कहते हैं—अगर मंटू राय यह लड़ाई न लड़ते, तो यह समस्या शायद फाइलों में ही दबी रह जाती।
अब सवाल सीधा है—
क्या प्रशासन किसी बड़ी बीमारी या मौत का इंतज़ार कर रहा है?
या फिर मंटू राय की इस जनहित की लड़ाई का असर ज़मीन पर भी दिखाई देगा?
गांव की निगाहें अब प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।



