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गहमर : भतौरा में महिलाओं का फूटा गुस्सा, शराब दुकान पर ताला जड़ किया विरोध प्रदर्शन

गाजीपुर : जिले के बारा न्याय पंचायत के अंतर्गत भतौरा गांव में अंग्रेजी और देशी शराब की दुकानों को हटाने की मांग को लेकर हरकरनपुर गांव की महिलाओं और बच्चों ने उग्र प्रदर्शन किया। हाथों में लाठी-डंडा और तख्तियां लेकर पहुंचीं महिलाओं ने शराब की दुकानों में ताला जड़ दिया और चौकी प्रभारी विवेक पाठक को चाभी सौंप दी।

शराब की दोहरी मार से त्रस्त ग्रामीण

गांव में पहले से ही देशी शराब की एक दुकान संचालित हो रही थी, जिससे स्थानीय लोग पहले ही परेशान थे। जब नए सत्र में अंग्रेजी शराब की दुकान खोलने का निर्णय लिया गया, तो हरकरनपुर गांव की महिलाओं का धैर्य जवाब दे गया। उनका कहना था कि शराब की दुकान के कारण गांव का माहौल खराब हो रहा है, अराजक तत्वों का जमावड़ा बढ़ रहा है, और महिलाओं तथा बच्चों की सुरक्षा पर संकट मंडरा रहा है।

दुकानदारों में हड़कंप, भाग खड़े हुए मालिक

महिलाओं के आक्रोश को देखते हुए दुकानदारों में खलबली मच गई। जैसे ही प्रदर्शनकारी दुकान पर पहुंचे और ताले जड़े, दुकानदार मौके से फरार हो गए। विरोध कर रही महिलाओं ने प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की और चेतावनी दी कि यदि शराब की दुकानें जल्द नहीं हटाई गईं, तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करेंगी।

प्रशासन ने दिया आश्वासन, लेकिन कब होगी कार्रवाई?

घटना की सूचना मिलते ही चौकी प्रभारी विवेक पाठक पहुंचे और प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन महिलाएं अपनी मांग पर अड़ी रहीं। इसके बाद नायब तहसीलदार पंकज कुमार भी मौके पर पहुंचे और उच्चाधिकारियों को मामले से अवगत कराने का आश्वासन दिया। कोतवाल अशेष नाथ सिंह ने कहा कि महिलाओं की मांग को गंभीरता से लिया जा रहा है और आबकारी विभाग को इस संबंध में जानकारी दे दी गई है।

समाज में शराब के खिलाफ बढ़ती जागरूकता

गांव में शराब की दुकानों का विरोध सिर्फ एक छोटी घटना नहीं, बल्कि समाज में बढ़ती जागरूकता का संकेत है। महिलाओं ने यह साबित कर दिया कि वे अपने परिवार और समाज की सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकती हैं। सवाल यह है कि प्रशासन कब तक इस गंभीर समस्या पर ठोस कार्रवाई करेगा? क्या यह सिर्फ एक और प्रदर्शन बनकर रह जाएगा, या फिर महिलाओं के इस साहसिक कदम से वास्तव में कुछ बदलाव आएगा?

“हम अपने बच्चों का भविष्य खराब नहीं होने देंगे”

महिलाओं ने साफ शब्दों में कहा कि यदि प्रशासन ने उनकी मांग को नजरअंदाज किया, तो वे इससे भी बड़े आंदोलन के लिए तैयार हैं। उनके अनुसार, शराब की दुकानें केवल नशे का अड्डा नहीं, बल्कि अपराध और सामाजिक बुराइयों का केंद्र बनती जा रही हैं।

अब देखना यह होगा कि सरकार और प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और कब तक भतौरा की इन साहसी महिलाओं को न्याय मिलता है!

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