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गंगा की धरती पर जन्मा एक ‘रक्तवीर’—शीर्ष दीप, जिसने मानवता को जीवन का दीप दिया!

गाजीपुर। गंगा किनारे बसा यह शांत जिला आज गर्व से भर उठा है, क्योंकि इसके एक बेटे ने मानवता की सेवा में वह कर दिखाया है, जिसे बड़े-बड़े महानगरों में भी लोग केवल सपने में ही सोच पाते हैं। जीवन रक्षक फाउंडेशन, गाजीपुर के संस्थापक शीर्ष दीप शर्मा ने रक्तदान के क्षेत्र में एक नया स्वर्णिम अध्याय रचते हुए अपना 55वां रक्तदान किया। रविवार को उन्होंने वाराणसी स्थित होमी भाभा कैंसर हॉस्पिटल में सिंगल डोनर प्लेटलेट (SDP) का दान कर यह उपलब्धि हासिल की।

शीर्ष दीप अब तक 26 बार सम्पूर्ण रक्त और 29 बार SDP दान कर चुके हैं। कुल 55 दान के साथ वे गाजीपुर के सबसे अधिक रक्तदान करने वाले सक्रिय रक्तदाता बन गए हैं। यह उपलब्धि न केवल एक रिकॉर्ड है, बल्कि मानवता के प्रति एक ऐसा समर्पण है, जो दुर्लभ है।

उनकी संस्था “जीवन रक्षक फाउंडेशन” ने अब तक 2000 से अधिक जरूरतमंद मरीजों को समय पर रक्त उपलब्ध कराकर नई जिंदगी देने का काम किया है। कैंसर, डेंगू और थैलेसीमिया जैसे खतरनाक रोगों से जूझ रहे मरीजों को समय पर SDP और ब्लड दिलाना कई बार कठिन होता है, लेकिन ऐसे समय में शीर्ष दीप जैसे दाता किसी देवदूत की तरह सामने आते हैं।

शीर्ष दीप का यह सतत सफर बताता है कि एक व्यक्ति की निस्वार्थ भावना पूरे समाज को नई सोच दे सकती है। उनका प्रयास युवाओं के लिए प्रेरणा का पुंज बन गया है—यह विश्वास जगाते हुए कि मानवता की सेवा सबसे बड़ी धर्मकर्म है।

गाजीपुर की मिट्टी ने भले ही अनेक सुपुत्र जन्मे हों, पर शीर्ष दीप सचमुच अपने नाम की तरह गाजीपुर का “शीर्ष” बनकर उभरे हैं। उनका रक्तदान केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि संवेदना, करुणा और कर्तव्य का वह उजाला है, जो आने वाले समय में पूरे प्रदेश के लिए मिसाल बनेगा।

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