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एक पद की ज़िद… और पूरा पैनल हार गया : ARP चुनाव में समझौते की राजनीति बनाम जनादेश!

गाजीपुर। में अकादमिक रिसोर्स पर्सन (ARP) संगठन का चुनाव न केवल शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक रहा, बल्कि यह संगठनात्मक राजनीति का एक गहरा संदेश भी दे गया। यह चुनाव इस बात का सजीव उदाहरण बन गया कि संवाद, संतुलन और त्याग ही संगठन को मजबूती देता है, जबकि हठ और पद-लालसा कई बार पूरे पैनल को गर्त में धकेल देती है।

प्रदेश कार्यकारिणी के निर्देश पर मऊ जनपद से आए दो ARP पर्यवेक्षकों की देखरेख में निर्वाचन प्रक्रिया संपन्न हुई। अध्यक्ष, महामंत्री और संगठन मंत्री—तीनों पदों पर दो-दो उम्मीदवारों ने नामांकन किया। सभी नामांकन वैध पाए गए और लोकतांत्रिक परंपरा के अनुसार गुप्त मतदान कराया गया।

मतगणना के बाद परिणाम स्पष्ट थे—

अध्यक्ष: श्री दिवाकर सिंह (9 मतों से विजयी)
महामंत्री: श्री जनार्दन यादव (15 मतों से विजयी)
संगठन मंत्री: श्री अशोक यादव (12 मतों से विजयी)

इसके अतिरिक्त वरिष्ठ उपाध्यक्ष, कोषाध्यक्ष और मीडिया प्रभारी पदों पर निर्विरोध निर्वाचन हुआ। लेकिन इस चुनाव की असली कहानी मतगणना से पहले लिखी जा चुकी थी।

सूत्रों के अनुसार, चुनाव दो स्पष्ट पैनलों के बीच लड़ा जा रहा था— एक पैनल का नेतृत्व सैदपुर से ARP दिवाकर सिंह कर रहे थे, जबकि दूसरा पैनल मोहम्मदाबाद से ARP पियूष राय के साथ था। चुनाव से पूर्व आपसी बातचीत में दिवाकर सिंह के पैनल ने संगठनात्मक संतुलन दिखाते हुए पियूष राय के पैनल को अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद देने पर सहमति जता दी थी। लेकिन मामला तब बिगड़ गया जब पियूष राय का पैनल महामंत्री पद भी अपने ही पाले में रखने पर अड़ गया। यहीं से सहमति टूटी, संवाद खत्म हुआ और चुनाव की राह तय हो गई।

इसके बाद जो हुआ, वह लोकतंत्र का सीधा फैसला था।
चुनाव हुआ—और नतीजा यह कि दिवाकर सिंह का पैनल सभी प्रमुख पदों पर विजयी हो गया, जबकि पियूष राय सहित उनका पूरा पैनल हार का सामना करता नजर आया।
राजनीतिक जानकारों और ARP साथियों के बीच यह चर्चा आम है कि

“यदि एक पद छोड़ दिया गया होता, तो शायद पूरा संगठन साथ खड़ा होता। लेकिन एक पद की ज़िद ने पूरे पैनल से सब कुछ छीन लिया।”

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