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मुख्तार के कभी करीबी रहे बहुचर्चित प्रॉपर्टी डीलर शकील हैदर की मौत

गाजीपुर। मुख्तार अंसारी के कभी करीबी रहे प्रॉपर्टी डीलर शकील हैदर की मौत की खबर मिली है। वह इन दिनों लखनऊ जेल में निरुद्ध था और तबीयत बिगड़ने के बाद मेडिकल कॉलेज में उसे दाखिल कराया गया। जहां मंगलवार की शाम करीब तीन बजे उसका दम टूट गया।

शकील हैदर मूलतः गाजीपुर के हुड़रहीं थाना नोनहरा का रहने वाला था। उसे कहां सुपुर्दे खाक किया जाएगा। फिलहाल यह तय नहीं है। वैसे माना जा रहा है कि शव लखनऊ से उसके पैतृक गांव हुड़रहीं लाया जाए।

शकील हैदर को लखनऊ पुलिस पिछले साल अगस्त में गिरफ्तार कर जेल भेजी थी। वह कार्रवाई धोखाधड़ी के आरोप में हुई थी। जेल जाने के बाद भी शकील हैदर पर धोखाधड़ी के कई मामले दर्ज हुए थे। उसके निकटस्थ सूत्रों के मुताबिक जेल में रहते शकील कई गंभीर रोगों से ग्रस्त होता चला गया। बल्कि ब्रेन स्ट्रोक के कारण वह लकवाग्रस्त भी हुआ।

…और कम रोचक नहीं है शकील हैदर की कहानी  

झूठी शान के लिए फिजूलखर्ची। फिजूलखर्ची के लिए कर्जखोरी और कर्जखोरी के लिए धोखाधड़ी और जेल प्रवास। फिर अब जेल प्रवास में ही मौत। शकील हैदर को करीब से जानने वालों का कहना है कि वह झूठी शान में जीने वाला शख्स था। उस शान में उसे फिजूलखर्च से भी परहेज नहीं था। नोट उसके लिए कागज के टुकड़े की तरह थे। सौ की जगह हजार खर्च करने की आदत उसकी रोजमर्रा में शुमार थी। वह चेनस्मोकर था। गोल्ड फ्लैक से लगायत और भी महंगे ब्रांड की सिगरेट उसकी पसंदीदा रही। वह महंगी लग्जरी गाड़ियों का भी शौकीन रहा। उसके गाड़ियों के बेड़े में इंडिवर स्पोर्टस तक रही। बड़े-बड़े रसूखवालों से यारी करना उसका शौक था। खासकर सत्ता में प्रभावी नेताओं के करीब रहना उसका शगल रहा। डेढ़ दशक पहले तक गाजीपुर में उसकी पहचान एक मामूली ठेकेदार के रूप में थी। गाजीपुर जिला पंचायत में उसने ठेकेदारी शुरू की थी। सबसे पहले वह हम मजहब के नाते मऊ विधायक मुख्तार अंसारी को पकड़ा। उसके बाद पूर्व मंत्री ओमप्रकाश सिंह से सट गया। तब उसकी उस मौका परस्ती से मुख्तार एंड कंपनी एकदम से चिढ़ गई थी। एक बार की बात है। मुख्तार के भाई सांसद अफजाल अंसारी बीमार थे और लखनऊ के सहारा हॉस्पिटल में दाखिल थे। शकील उन्हें देखने पहुंचा था। वापसी में मुख्तार के एक बंदे ने उसको जमकर धुन दिया था। फिर जब शादाब फातमा प्रदेश की तत्कालीन सरकार में मंत्री बनी थीं तब शकील हैदर उनके भी करीब पहुंच गया। जाहिर है कि इन नेताओं की पहुंच और प्रभाव के बूते कुछ ही साल में वह लंबा खिलाड़ी बन गया और उस खेल में शकील हैदर पर बैंकों का लंबा कर्ज भी चढ़ता गया। शायद उसके लिए अपने खेल में गाजीपुर छोटा पड़ने लगा और लखनऊ में ठाकुरगंज शीशमहल इलाके में जा बसा।

धरम-करम में भी खुले हाथ खर्च करता

शकील हैदर जहां अपनी फितरत से रुपये कमाता। वहीं धरम-करम में भी बेहिचक खर्च करता। वह शिया मुसलमान था। साल के शेष दिनों में जहां रहे मगर मुहर्रम में वह अपने गांव हुड़रही आना नहीं भूलता था। मुहर्रम की नौवीं तारीख को वह मजलिस कराता। उस मजलिस में देश-विदेश के हजारों श्रद्धालु जुटते। उनके लिए अपनी ओर से भोजन-भात का इंतजाम कराता। मजलिस के लिए करोड़ों की लागत से आलीशान इमामबाड़ा भी बनवाया और उसका नाम ‘बाबे बाबुल’ रखा। शिया समुदाय की मानी जाए तो ऐसा आलीशान, खूबसूरत इमामबाड़ा कम से कम पूर्वांचल में तो और कहीं नहीं है। वह मौके बेमौके जब भी गांव आता तब लाखों रुपये खैरात में बांटता था। शकील हैदर की  गिरफ्तारी लखनऊ के थाना वजीरगंज में करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी के दर्ज मामलों में हुई थी। आरोप था कि शकील कुछ ही साल पहले लखनऊ के जेहटा बरावन कलां में कुल पांच बीघा भूखंड में 70 प्लॉट की कॉलोनी डेवलप की। फिर दूसरों को बैनामा के बाद भी उन प्लॉटों को गिरवी रख अपने नाम पर करोड़ों रुपये बैंक से कर्ज लिया। इस धोखाधड़ी के लिए उसने बैंक के तत्कालीन अधिकारियों से रिश्तेदारी और ‘शुभ-लाभ’ की नातेदारी जोड़ी थी। उसी बीच एक मामला यह भी प्रकाश में आया था कि अमेठी में बगैर निर्माण कराए पीडब्ल्यूडी से करोड़ों का भुगतान ले लिया था।

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