सख्ती: सपा के आठ नेता नामजद और 50 अज्ञात कार्यकर्ताओं पर एफआईआर

गाजीपुर। सरकार के विरोध में सोमवार को सड़क पर उतरे सपाइयों को एक और पुलिसिया कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। शहर कोतवाली में आठ नामजद और करीब 50 अज्ञात पर एफआईआर दर्ज हुई है। उन पर निषेधाज्ञा और महामारी एक्ट के उल्लंघन का आरोप है। पुलिस की इस कार्रवाई को लेकर पार्टी नेताओं में तीखी प्रतिक्रिया हुई है।
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नामजद सपाइयों में छात्रसभा के जिलाध्यक्ष अमित सिंह लालू के अलावा जिलापंचायत सदस्य सत्येंद्र यादव सत्या, अभिषेक यादव, नीरज यादव, संदीप यादव, नितिन यादव, तहसीन अहमद तथा आमिर अली हैं।
मालूम हो कि पार्टी के प्रदेश नेतृत्व के आह्वान पर यूथ फ्रंटल के कार्यकर्ता बेरोजगारी, महंगी पढ़ाई, भ्रष्टाचार, बिगड़ती कानून व्यवस्था आदि मुद्दों को लेकर काफी संख्या में समता भवन में एकत्र हुए थे। उसके बाद उनका हुजूम ज्ञापन देने के लिए डीएम कार्यालय की ओर चल पड़ा था। मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारियों ने लागू निषेधाज्ञा और कोविड-19 महामारी का हवाला देते हुए हुजूम को न सिर्फ रोकने की कोशिश की थी बल्कि मात्र पांच लोगों को ही ज्ञापन देने के लिए डीएम कार्यालय तक जाने को कहा मगर उनकी एक नहीं सुनी गई और हुजूम आगे बढ़ निकला। पुलिस ने बलपूर्वक रोकना चाहा तो कार्यकर्ता उनसे उलझ पड़े थे। आखिर में पुलिस को लाठियां भांजनी पड़ी थी। बावजूद कार्यकर्ता डीएम कार्यालय के सामने पहुंच कर धरने पर बैठ प्रशासन विरोधी नारेबाजी शुरू कर दिए थे और आखिर में डीएम की नामौजूदगी में मौके पर पहुंचे एसडीएम सदर प्रभास कुमार को ज्ञापन सौंप कर ही उठे थे। उस घटनाक्रम में जहां कुछ कार्यकर्ताओं को पुलिस की लाठियों की चोट आई वहीं उनकी जवाबी कार्रवाई में पुलिस कर्मी भी जख्मी हुए। उनमें गोराबाजार पुलिस चौकी इंचार्ज अनुराग गोस्वामी के हाथ का अंगूठा लहूलुहान हो गया था। इन्होंने ही एफआईआर दर्ज कराई है।

उधर खुद के खिलाफ एफआईआर पर प्रतिक्रिया जताते हुए जिला पंचायत सदस्य सत्येंद्र यादव सत्या ने कहा कि पुलिस अपनी पेशबंदी में यह एफआईआर दर्ज की है। हकीकत यही है कि पुलिस निहत्थे कार्यकर्ताओं पर बर्बर कार्रवाई की। उधर सपा के जिलाध्यक्ष रामधारी यादव का कहना है कि यह सब सरकार की तानाशाही है। अपने विरोध में उठने वाली आवाज को दबाने के लिए वह ऐसा कर रही है।